Wednesday, June 25, 2014

भारत में पारिवारिक रक्त सम्बन्धों में यौन सम्बन्ध

सुन रहा हूँ कि भारत के स्वास्थ्य मन्त्री जोकि स्वयं भी डाक्टर हैं एड्स की रोकथाम के लिए कण्डोम की अपेक्षा प्राचीन भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने की बात करी है! नीचे की पंक्तियों में हमारी महान प्राचीन भारतीय संस्कृति की एक बानगी प्रमाण सहित प्रस्तुत कर रहा हूँ, जरा नजर करिए और फिर सोचिये कि यदि प्राचीन भारतीय संस्कृति आ गई तो घर के सभी सदस्य और यहाँ तक कि जानवर भी एड्स के रोगी होंगे! हमारे प्राचीन धार्मिक ग्रन्थ यही कहते हैं!
*पारिवारिक रक्त सम्बन्धों में यौन सम्बन्ध*
वशिष्ठ की कन्या शतरूपा उसको पति मानकर उसके साथ रही (हरिवंशअंक 2)
इन्द्र अपने पड़पोते जनमेजय की स्त्री वपुष्टमा के साथ रहा, और यह अपराध जनमेजय ने बर्दाश्त किया (हरिभविष्य पर्व अंक 5)
सोम के दोहित्र अथवा पुत्र दक्ष प्रजापति ने अपनी कन्याएं अपने पिता या दादा सोम को दीं. जनमेजय यहाँ शंका प्रकट करता है कि यह अनैतिक कृत्य कैसे हुआ? उसको वैशम्पायन का उत्तर था कि यह प्राचीन रीति है (हरिवंश अंक 2प्र. 7)
ब्रह्मदेव के पुत्र दक्ष ने अपनी कन्या ब्रह्मदेव को दी, उससे नारद का जन्म हुआ. (हरिवंश अंक 3प्र. 8)
*पशुओं के साथ सेक्स*
पशुओं के साथ यौनाचार करना भी आर्यों में प्रचलित था! ऋषि किन्दम द्वारा हिरनी के साथ मैथुन किये जाने की कहानी सर्वविदित है। एक दूसरा उदाहरण सूर्य द्वारा घोड़ी के साथ मैथुन किये जाने का है। लेकिन सबसे वीभत्स उदाहरण अश्वमेघ यज्ञ में स्त्री द्वारा घोड़े के साथ मैथुन किये जाने का है
औरतों को कुछ अवधि के लिए भाड़े पर देने की प्रथा भी थी। राजा ययाति ने अपने गुरु गालव को अपनी पुत्री माधवी भेंट में दे दी। गालव ने अलग अलग अवधि के लिए माधवी ने तीन राजाओं को भाड़े पर दिया। उसके बाद उसने विवाह रचाने के लिए विश्वामित्र को दे दिया। वह पुत्र उत्पन्न होने तक उनके साथ रही। उसके बाद गालव ने लड़की को वापस लेकर पुनः उसके पिता ययाति को लौटा दिया! (हरिवंश पुराण अध्याय 3)
पिता अपनी पुत्री से विवाह कर सकता था। वशिस्ठ ने अपनी पुत्री सतरूपा, मनु ने अपनी पुत्री इला, सूर्य ने ऊषा से विवाह किया। (हरिवंश पुराण अध्याय)
अच्छी संतानोत्पत्ति के लिए आर्य लोग देव वर्ग के किसी भी पुरुष के साथ अपनी स्त्रियों को सम्भोग की अनुमति देते थे जिसे अवदान कहा गया है।
बहुत से साक्ष्य मिल जायेंगे यदि शास्त्र खंगालना शुरू किया जाये तो, उनमें यह देखिये कि लड़की की उम्र क्या है, विवाह के समय| एक छोटा सा लेख यह भी है: चौबीस वर्ष का पुरुष आठ वर्ष की लड़की से विवाह करे, यह हमारी स्मृतियों में है. विवाह की रात्रि में समागम किया जाय, इस प्रकार के भी स्मृति वचन हैं. अतः आठ वर्ष की लड़कियाँ समागमेय हैं, यह मानने की रूढ़ि इस देश में थी, इसमें शक नहीं.
कन्याके जन्म से लेकर छः वर्ष तक दो-दो वर्ष की अवधि के लिये उस पर किसी न किसी देवता का अधिकार होता था. अतः उसके विवाह की आयु का निर्धारण आठ वर्ष कियागया. क्या इससे यह संदेश नहीं जाता कि कन्या जन्म से ही समागमेय समझी जाती थी क्योंकि छः वर्ष बाद उस पर से देवताओं का अधिकार समाप्त हो जाता था. यमसंहिता और पराशर स्मृति दोनों ही रजस्वला होने से पूर्व कन्या के विवाह की आज्ञा देते हैं.
-भारतीय विवाह का इतिहास
वि.का. राजवाडेपृष्ठ : 86-91
अब कौन सी महान प्राचीन भारतीय संस्कृति लाना चाहते हैं स्वास्थ्य मन्त्री जी आप लोग खुद निर्णय करें मैं कुछ नहीं बोलुंगा! यह हमारा इतिहास है गर्व करो भक्तों इस पर

60 comments:

  1. ये तो अति हो गयी है जाने किस संस्कृति को जन्म देना चाह रहे हैं क्या जरूरी है जो पहले गलत होता रहा उसे ही माना जाये क्यों न उसे नकार कर एक नव निर्माण किया जाए स्त्री को उसका स्वरूप वापस दिया जाए ………आपकी ये पोस्ट फ़ेसबुक पर शेयर कर रही हूँ ताकि सबको पता चले ।

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    1. Us chutiye(fake blogger) ne bola aur aapne yki bhi kr liya. Bina kisi proof ke

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    2. Us chutiye(fake blogger) ne bola aur aapne yki bhi kr liya. Bina kisi proof ke

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    3. आपने बिना तथ्य के विश्वास कैसे किया

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    4. वंदना जी नीचे देखिए
      इस मुल्ले को इसकी बातो का जवाब मिल चुका है ।
      लेकिन मुझे अफ़सोस इस बात का है कि आप जेसी पढ़ी लिखी ओर सुंदर महिला भी ऐसे मुल्लों का असली चेहरा नहि देख पाती ओर जल्द बाज़ी में क़दम उठा लेती है ।
      आप से विनती है कि अपने धर्म ओर संस्कृति का ऐसे मज़ाक़ ना बनवाए।

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  2. मुझे तो ये सोच कर शर्म आ रही है अपनी ही बेटीओ,पोतियों के साथ संत,मुनियो को कोई आपत्ति नही हुई,,,और बात करते थे वो उच्च शिक्षा की,,,

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  3. उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़,,,,,,ये कैसी भारतीय संस्कृति में हम जीने को मजबूर है,जब इतना सब कुछ प्राचीन काल से ही चला आ रहा है तो फिर आज के नव पुरुषो को दोष क्यों??? शर्म आ रही है अब तो कि ऐसी है हमारी भारतीय संस्कृति,अगर अब भी हम इस घटिया नियमो से बाहर नही निकल पाये तो शायद आने वाले कई हज़ार वर्षो तक शायद ऐसे ही जीना पड़ेगा,,,,बदलना पड़ेगा इन घटिया मानसिकता वाली चलती ही नीति को,,,,तभी कुछ बचा रह पाये शायद,,,,

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    1. प्रचीन भारतीया ग्रंथो के बारे में किसी सिर्फिरे बेवकूफ ने बिना तथ्यों के कुछ भी बेहुदा लिख दिया ,लिखने वाला कौन है ,उसकी असलियत क्या है और लेख की प्रामानिकता क्या है ये खोजे बिना ,उसको सेअर करने लग जाते है ,गिल्टी करने लग जाते है , यही जब किसी दूसरे धर्म ( इतिहास ) के बारे में जब सही तथ्य कोई बोल देता है तो हाहाकार मच जाता है , ऐसे फर्जी लेखक ब्लोग्स लिखने में वा भारतीया sanskrati का मजाक बनाने में लगे .

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  4. मैं तो वाकई चकि‍त होती हूं जब यें सब पता लगता है.....

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    1. तेरे जैसी घटिया औरत चकित ही होगी कमीनी

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    2. तेरे जैसी घटिया औरत चकित ही होगी कमीनी

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    3. तेरे जैसी घटिया औरत चकित ही होगी कमीनी

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    4. प्रचीन भारतीया ग्रंथो के बारे में किसी सिर्फिरे बेवकूफ ने बिना तथ्यों के कुछ भी बेहुदा लिख दिया ,लिखने वाला कौन है ,उसकी असलियत क्या है और लेख की प्रामानिकता क्या है ये खोजे बिना ,उसको सेअर करने लग जाते है ,गिल्टी करने लग जाते है , यही जब किसी दूसरे धर्म ( इतिहास ) के बारे में जब सही तथ्य कोई बोल देता है तो हाहाकार मच जाता है , ऐसे फर्जी लेखक ब्लोग्स लिखने में वा भारतीया sanskrati का मजाक बनाने में लगे .

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  5. और देखिये वेद प्रकाश शर्मा जैसे लोग बेकार में इसे धर्म से जोड कर एक बवाल खडा करना चाह्ते हैं मैने सिर्फ़ इस बात को अपनी फ़ेसबुक वॉल पर इसलिये लगाया कि ताकि सबको पता चले कि कितनी गलत थीं प्राचीन परंपरायें मगर उन्होने तो हंगामा ही खडा कर दिया यदि हिम्मत थी तो यहाँ जिन्होने लिखा है उनसे बहस करते और ढूँढते संदर्भ ………https://www.facebook.com/rosered8flower/posts/10202029825138702?comment_id=10202029918901046&ref=notif&notif_t=like

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    1. तुम्हें जरा भी शर्म नहीं आई की एक मुस्लिम हिंदू नाम से आईडी बनाकर तुम्हें बेवकूफ बना रहा है? यदि ये सत्य है तो आज ऐसे विवाह क्यों बंद हो गये जबकि मुस्लिमो में आज भी ये संबंध ही चलते हैँ। यहाँ वैश्य समाज के लोग अधिकांश है जो इस सूअर के फट को सराह रहे हैं। शर्म करो डूब मरो कि एक मुल्ला तुम्हें पागल बनाने में सफल हो गया होता अगर हम विरोध न करते तो। तुम जैसे लोग इस महान धर्म संस्कृति की कमजोर कडी हो।

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  6. आप चाहें तो उन्हें उनके सवालों के जवाब दे सकते हैं क्योंकि लगता है आपने पढकर ही ये सब लिखा होगा

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  7. VANDANA JI aapki mansha beshak saaf rahi ho isme koi shak nahi lekin logo ne is prasang ki aad me khud ko doodh ka dhula hua batana hai. jaise ki uper gaurav bansal ji keh rahe hain ki fir aaj k yuva ko dosh kyu. jaise bacchhe filmo se galat gyan jaldi arjit karte hain bajaye ki acchhi baaton ki seekh lene ke usi prakar yaha logo ne is prasang se apna fayeda dekhna hai. isliye is se behtar tha ki ise fb par nahi pesh kiya jata aur n hi writer is prasang ko saamne late. aap/ham logo ki soch per control nahi kar sakte. kripya meri baat ko anyetha n le.

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  8. बिलकुल अनामिका जी सही कहा आपने,,,,लेकिन मेरा उद्देशय ये बिलकुल नही कि आज का युवा भी वो गलत करे जो सदियों से होता आ रहा है,,,मैंने तो उस बात का तर्क दिया की परम्परा शायद चली ही आ रही,,,,उसको बदलना तो होगा ही,,,वरना सब बेकार,,,

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  9. @अनामिका जी मेरा तो ये सोचना है कि जो भी गलत हो उसका बहिष्कार हो क्योंकि यदि हम चुप रहते हैं तो हम भी उसमें शामिल हैं और देखिए सारे इतिहास पुराण किसी ने भी नहीं पढे होंगे इसलिये पूरा जानकार कोई नही है हम मे से इसलिये यदि किसी ने कोई तथ्य यदि पढा है कहीं और लिखा है प्रूफ़ के साथ तो विश्वास करना पडता है और उसी को आधार बनाकर गलत के प्रतिकार स्वरूप मैने इसे शेयर किया है तो मुझे नही लगता इसमें कोईबुराई है क्योंकि गलत तो वो है जो पह्ले होता आया है या अब हो रहा है और हमारी कोशिश इतनी भर होनी चाहिए कि उसका विरोध करें ताकि गलत परंपरायें अपनी जडें न जमा सकें

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  10. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन नायब सूबेदार बाना सिंह और २६ जून - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  11. आपका लेख प्रभावोत्पादक है और पढ़कर यह सब बहुत वीभत्स प्रतीत हो रहा है। किन्तु सभी दृष्टान्त पौराणिक कथाओं से हैं जो प्रमाणिक नहीं और जिनकी रचना पांचवी शति के आप-पास हुई है जबकि जिनके उदाहरण आपने दिए हैं उनका अस्तित्व ही स्थापित नहीं। काम से कम ज्ञात इतिहास या वेद-उपनिषदों में या कि दसवीं शति तक तो नहीं। फिर यह सब जहाँ भी गिनाये गए है,अपवाद रूप ही है.
    यह सही है कि सनातन धर्म में काम की स्वीकार्यता है तथा बौद्ध प्रभाव में ब्रह्मचर्य को मिली श्री के विरुद्ध शैव-वैष्णवों ने काम को प्रस्थपित करने में भरपूर प्रयास किया है। किन्तु ज्ञात इतिहास में ऐसे उदाहरण नहीं जो आपने गिनाये हैं। यह सब पुराण कथाएँ हैं जो काफी कुछ प्रतीकात्मक हैं और कपोल-कल्पित भी हो सकती हैं। यह सही है कि बारह वर्ष पूर्व कन्या का विवाह शास्त्र सम्मत रहा है पर पितृ-गृह से विदाई नहीं। अतः विवाह रात्रि को समागम की अनिवार्यता की बात से मैं सहमत नहीं
    फिर बन्धु,हमारी संस्कृति का आईना तो रामचरित मानस है। उसे क्यों नहीं स्वीकारा जाये ?

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  12. yaar ye ajeeb desh hai,jaha janwar la pisab pite hai

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  13. jaha janwaro ke sath sex hota hai

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  14. lekin insaan ke pas nehi aate,ajeeb murkh log hai,is desh ke

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  15. Yeh jo bhi likha hai uska koi pramaan diya nahi hai, Aur Shastro ki baat kar rahe hai , Hamare shastra varsho puraane hai vo bahut baar modified hue hai. Par mein abhi bhi ye Blog ko maanta nahi hu , Kyuki isme koi saboot nahi dala hai. Ye koi Muslim ya Christian ki bani banai hui pesh karsh hai.
    Hari Bhavishya Modern lag raha hai , Par..Bhavishya Puraan hai jisme aisi koi baate mil nahi rahi hai. Kripiya ye bani banai hui kalpanik post hai jiska koi saboot nazar nahi aata...Kindly dont believe , Ye hindu Dharm ko todney ki koshish ki ja rahi hai,

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  16. Kaun hai Ye bhai ja kar thik se puran parh uske baad post karna ........................... sabse bari baat jara hindi to dhang se samjh phir likh...........

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  17. Tu kya apna bua ka larka hai jara apne baap se puch..........

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  18. jisne bhi ye post dala hai ...vo apni man ki bakwas daal diya hai...aur vishwas ke saath keh sakta hu ye koi muslim hi ho sakta hai.
    Aisa kuchh puraan mein nahi likha hai jo hai. Yaha kuchh hindu logo ne isse sach maan kar apne apne views diye hai . jo galat hai. Koi Faaltu Fake Blog likhe aur hum maan le , aisa ho nahi sakta atleast baat puraano aur shastro ki ho to kabhi bhi sabut ke bina nahi maanni chahiye.

    Kuchh Hindu virodhi tatva aisa juth felaake..Hinduo ko behkaana chahte hai..inse hamesha door rahiye, Hamare shastra aur puraan aur unme likhi baate 100% pavitra hai aisa kuchh nahi hai jo is blog mein likha hai.

    Jay Hind !

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  19. अगर आप इस देश को शास्त्रों के अनुसार चालाओ गे तो. सारे देश में हाहाकार मच जाएगा

    1. जहां एक पुरष कई स्त्रियां रख सकता था दसरथ की तीन रानियां थी, पांडू की दो मद्वि और कुंती , अर्जुन की सुभद्रा और द्रोपदी, किर्शन की तो सोलह हजार कही जाती है
    2. एक स्त्री कई पति थे द्रोपदी के पांच पति थे
    3.अर्जुन ने अपनी बहिन के साथ शादी की सुभद्रा जी किरसन की बहिन और कुंती किर्शन की बुआ थी
    4.गोतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का बलात्कार करने वाले इंद्र को कोई सजा नहीं दी गई बलिक अहिल्या का त्याग कर दिया थी ऋषि ने
    5.शिव की गोरी, पर्वर्ति पत्निय थी

    इन सब नियमों और कार्यों को आज जायज माना जाए तो क्या होगा ???

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    1. एक बात बताओ अजीब नहीं है कि सभी अवतार भगवान किसी भी धर्म के हों पुरूष ही हैं मुख्यतः
      और तो और पुजारी या धर्माधिकारी तो पुरूष ही होते हैं
      ऐसा वैसा ही है जैसे एलियन को झूठलाना
      हा हा हा हा

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    2. Bevkoof balatkaar nahi akarsan tha ye na karta to kahani age kaise badti

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  20. ye koi pagal hai jo kuch bhi likh raha hai.. hamare hindu dharm ko badnaam karne ke liye... jinka khud ka koi itihaas nahi hota wo aise hi jalte hai..

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  21. hamare shastro ke hisab se duniya ka har insan hindu hai... aur janam lene ke baad usne jo dharm apnaaya ussi se jana gaya.. baki sabhi dharm insano dwara banaye gaye hain lekin yahi ek dharm yugo se chala aa raha hai... jiski koi starting date nahi.

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  22. sabhi log net pe swami balendu ki photo dekho... dekhne se hi cartoon natakbaaz lag raha hai.. cheap popularity ke liye kuch bhi likhe ja raha hai. iske sath ek gori memni bhi hai.

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  23. Aaj ke semy me kon Hindu tin .tin petniya rek reha he ya. Kon apni behno she sadi ker reha he..?aaj ke semy me yehi kahseyt he Hindu derm ki .........or jis tera tu (aap to tuje keh nhi sekta ) bat ker rha he na eise mujhe legta tu Hindu to nhi ho sekta

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  24. main appko batana chata ho ki yai sirf hindu aur bhartiyu ka sach nahi hai yai sari duniya ka sach hai yai insaan ka sach hai insaan mai shatan bhi insaan bhi

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  25. aap sab log mujhe ek bat bataye , kya aapne apne jeevan me sare kam thik or sahi kiye hai , agar nahi to aap hamare dharm ki buri ya galat baton ki kichdi kyo pakate ho , hamari aapki jimmewari in galtiyo ko sahi kanre ki hai aur isiliye hamare dharma ko SANATAN kaha gaya hai jo vikas ke pat par agrasar ho.......... jisme hahesha sudhar ki gunjaish ho . Ek vivekwan insan ka farz hai ki kisi ki bhi sahi baton ko grahan kerein or galat boto ko choda jaye.

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  26. आपका कहना है कि पिता पुत्री के सम्बन्ध वैदिक काल में उचित थे महाशय जी जरा वेदों के बारे में भी देखिये वेद इस बारे में क्या कहते है -स लक्ष्मा यद विषुरूपा भवाति -अर्थव ८/१/२ अर्थात सगे सम्बन्धियों की कन्या से सम्बन्ध रखना बड़ा ही विषम है | आप तो वैदिक काल में कुछ ओर बता रहे थे जबकि वेदों में तो मौसी की लडकी , मामी की लडकी बुआ की लडकी आदि सगे सम्बन्धियों की कन्या से सम्बन्ध का निषेध है | ओर देखिये – ” पापामाहुर य: स्वसार निग्च्छात ” अर्थव १८/१/१४ अर्थत वो पापी है जो बहन से सम्बन्ध या विवाह करता है | देखा आपने वेदों में ऐसे सम्बन्धो का निषेध है | लेकिन क्या आप जानते है कि आपके ही भगवान बुद्ध ने अपने बुआ की लडकी यशोधरा से विवाह किया था अर्थात बुद्धो में इन सबकी छुट है आर्यों में नही |
    आप मनुस्मृति का निम्न श्लोक भी देखिये -
    ” असपिंडा च या मातुरसगोत्र च या पितु:|
    सा प्रशस्ता द्विजातीना दारकर्माणि मैथुन || मनु ३:५ || ” अर्थत जो स्त्री माता की छ पीढ़ी ओर पिता के गोत्र की न हो विवाह करने के लिए उत्तम है |
    देखो आर्यों में तो सगोत्र विवाह या सम्बन्ध तक का निषेध है फिर आप ये कहा से ले आये |
    अब आपके दिए उदाहरण देखते है – आपने लिखा वशिष्ठ का विवाह शतरूपा से हुआ | वाह क्या कहना आपका ये सब जानते है कि स्वयभू मनु की पत्नि का नाम शतरूपा था | देखिये ब्रह्माण पुराण २/१/५७ में शतरूपा को मनु की पत्नि बताया है ओर धरती के पहले स्त्री पुरुष | फिर आपने लिखा इला का विवाह मनु से ,,,ये भी आपकी मुर्खता कहे या कुंठा समझ नही आता लेकिन ये भी पौराणिक बन्धु जानता है कि मनु की पुत्री इला थी ओर उसका विवाह चन्द्रमा (सोम ) के पुत्र बुद्ध से हुआ जिनका एक पुत्र पुरुरवा था जिससे पुरु वंश चला |
    आपने ये भी लिखा है कि दोहित्र ने अपनी पुत्री का विवाह पिता चन्द्र से किया लेकिन उपर देखिये चन्द्र की पत्नि तारा थी जो ब्रहस्पति की पुत्री बताई है | उसी से बुध उत्पन्न हुआ था | मत्स्य पुराण में ऋषि अत्रि ओर अनसूया का पुत्र चन्द्र या सोम बताया है | आपने सूर्य की पुत्री उषा बताई लेकिन पुराणों में सूर्य के पुत्री में यमुना का उलेख है जो कि यम की बहन है | आपने अपने दिमाग के आधार पर सारा इतिहास गढ़ लिया | वेसे आप लोगो के विरोधाभास का क्या कहना एक तरफ तो हिन्दू ग्रंथो को काल्पनिक तो दूसरी तरफ अपना उल्लू सीधा करने के लिए उन्ही का साहरा लेते हो | एक बात पर रुकिए काल्पनिक है तो सब काल्पनिक ही मानिए |

    आपने एक प्रथा यज्ञ में अपने मन से गढ़ ली जिसका उलेख न वेदों में है ,न श्रोतसूत्रों में ओर न ही ब्राह्मण ग्रंथो में है वामदेव विर्कत | इसी पुष्टि में आपने सत्यवती ओर पाराशर का उदाहरण भी दिया | लेकिन आपकी कुंठा का क्या कहना महाभारत में जो स्थल नौका का था क्यूंकि सत्यवती एक मछुआरिन थी ,उसे आपने यज्ञ स्थल अपनी गोबरबुद्धि से कर दिया | वो महाभारत का प्रसंग है ओर महाभारत में उतरोतर श्लोक बढ़ते गये है जिनमे हो सकता है ये पूरा प्रसंग प्रक्षेप हो फिर भी जेसा आपने यज्ञ स्थल की बात की है तो बताइए सत्यवती के पिता ने कौनसा यज्ञ का अनुष्ठान किया | ओर यदि महाभारत ,रामायण में पाराशर ओर सत्यवती आदि के जेसे कोई अनुचित सम्बन्ध मिलते है तो इसका ये अर्थ नही कि वो उस संस्कृति या धर्म का सिद्धांत हो गया जेसा मेने उपर ही बता दिया है वो एक घटना मात्र है | आपने योनि शब्द की भी कल्पना कर ली ओर अयोनि की भी पता नही कहा से आपने संस्कृत ,हिंदी का ज्ञान लिया ये तो आप ही जाने लेकिन योनि या योनिज उन्हें बोलते है जो मैथुन आदि से उत्त्पन्न हो जेसे स्तनधारी प्राणी ,सर्प आदि ओर अयोनिज उसे बोलते है जो अमेथुनी अर्थात बिना मैथुन से उत्पन्न होए जेसे क्लोन , पसीने से उत्पन्न कीट , वर्षा ऋतु में उत्त्पन्न मच्छर , मछलिय आदि | इसके लिए वैशेषिक दर्शन भी देख सकते है | अपने पक्ष की पुष्टि के लिए आपने द्रोपती ओर सीता का उदाहरण दिया | आपने बताया कि द्रोपती की उत्त्पति घर के बाहर हुई जबकि महाभारत में ही लिखा है कि एक यज्ञ के अनुष्ठान द्वारा द्रोपती की उत्त्पति राजा द्रुपद के समक्ष हुई | आपने बाहर का काल्पनिक प्रसंग कहा से गढ़ लिया | आपने सीता का उदाहरण दिया | वेसे आपको बता देंवे महाभारत की तरह रामायण में भी प्रक्षेप है इसका उदाहरण है – चतुविशतिसहस्त्रानि श्लोकानाक्त्वान ऋषि:| तत: सर्गशतान पंच षटकाण्डानि तथोत्तरम ||बालकाण्ड ४/२ अर्थात रामायण का निर्माण २४००० श्लोको पांच सौ सर्ग ओर छह कांडो में कहा गया | जबकि आज प्राप्त रामायण में २५००० श्लोक ओर ७ काण्ड है इससे पता चलता है रामायण में प्रक्षेप है |
    सीता जनक की ही पुत्री थी इसका प्रमाण रामायण के निम्न स्न्धर्भो से ज्ञात होता है -रामायण में अनेक जगह सीता को जनक की आत्मजा कहा है | अमरकोश २/६/२७ में आत्

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    1. बहुत ही सुंदर ढंग से आपने इस मुल्ले को समझाया है।
      मेरी सभी हिन्दू भाई बहनो से गुज़ारिश है के ऐसे किसी भी मुल्ले की बात पे भरोसा ना करे ।
      पहले बात की तह तक जाए ओर फिर निर्णय करे ।

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    2. तारा वृहस्पति की पत्नी थी जिसका अपहरण चंद्र ने किया जिससे बुध हुआ
      कुछ भी बता रहे हो
      दशरथ की पहली पत्नि कौशल्या उसकी बहन थी
      क्या साबित करोगे तुम सब मुर्ख की तरह परंपरा के लिए लड़ रहे हो पर इतना पढ़े लिखे होकर भी ये नहीं समझते कि प्राचीन नियम केवल वैज्ञानिक आधार पर थे कोई भी किसी से संबंध बना सकता है इसका कोइ नियम किसी भी भगवान ने नहीं बनाया या ही यह पाप है. पर समस्या यह है कि मादा या नर खुद ये नहीं जान सकता कि कौन उसकी संतान है. इस समस्या के कारण और रोग से मुक्त स्वस्थ संतान की चाह में नियम बने इतनी सरल बात को सदियों से भारतवासी समझ क्यों नहीं रहे हैं धर्म वेद में सब साइंस है कुरान में सोशल साइंस है पर सब कुड़ा ही तुम सबको दिखता है असली वैज्ञानिक कारण नहीं दिखता जो हमारी दिनचर्या का अटूट हिस्सा है
      भाई धर्म के नाम पर बहस करने वाला या तो सबकुछ जाने और कभी जीवन में झूठ ना बोला हो वरना बुराई करना छोड़ दो.
      दुसरा औरत और मर्द कभी बराबर नहीं हो सकते। कारण वो रचनाकर्ता है और पुरूष उसका केवल सहयोगी. औरत को निर्णय लेना है कि श्रेष्ठ का वंश बढ़ाना है या बराबरी के चक्कर में किसी का भी चलेगा.
      इसका उदाहरण हमारा भारत है जहाँ भ्रष्टता खून में है कितना लड़ते हैं हम बिना बात के। हर तकनीक का दुरूपयोग हम भारतीय से ज्यादा कौन कर रहा है.

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    3. प्रचीन भारतीया ग्रंथो के बारे में किसी सिर्फिरे बेवकूफ ने बिना तथ्यों के कुछ भी बेहुदा लिख दिया ,लिखने वाला कौन है ,उसकी असलियत क्या है और लेख की प्रामानिकता क्या है ये खोजे बिना ,उसको सेअर करने लग जाते है ,गिल्टी करने लग जाते है , यही जब किसी दूसरे धर्म ( इतिहास ) के बारे में जब सही तथ्य कोई बोल देता है तो हाहाकार मच जाता है , ऐसे फर्जी लेखक ब्लोग्स लिखने में वा भारतीया sanskrati का मजाक बनाने में लगे .

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  27. आपने हिन्दू धर्म को बदनाम करने का निंदनीय कार्य किया है जो अप्रमाणिक और आधारहीन है आपके सभी तथ्य गलत और छोटी मानसिकता के प्रमाण हैं आप जैसे लोगो को पहले हिन्दू धर्मशास्त्रो का गहन अध्ययन कर लेनी चाहिए फिर कोई बात शेयर करे

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    1. महोदय,
      शायद आपने अध्ययन नहीं किया है हिन्दु नाम का कोई धर्म इस धरती कर नहीं है.
      हम मानव पैदा हुए मानवता ही धर्म है धर्म विज्ञान है बकबक नहीं इसमें क्या बदनामी
      जो लिखा वो इतिहास है
      जिस समय की बात हो रही है उस समय कितने मानव रहे होंगे
      आज भी कुछ जातियों में ऐसा विवाह विवशता में होना अब शुरू हुआ है क्या उस समस्या पर आप चर्चा करेंगे
      धर्म वह है जो हमें जीवन सुरक्षित और मिलजुल कर रहना सिखाता है बस

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  28. आपने हिन्दू धर्म को बदनाम करने का निंदनीय कार्य किया है जो अप्रमाणिक और आधारहीन है आपके सभी तथ्य गलत और छोटी मानसिकता के प्रमाण हैं आप जैसे लोगो को पहले हिन्दू धर्मशास्त्रो का गहन अध्ययन कर लेनी चाहिए फिर कोई बात शेयर करे

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  29. हिन्दू शास्त्रो का गहन अध्ययन किये बिना ही आपने जो तथ्य शेयर की है वह अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक है आप जैसे लोग ही भारतीय हिन्दू सभ्यता को कलंकित करने का निंदनीय कार्य कर रहे है जिसमे आप कभी सफल नही होंगे

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  30. सभी सुधि लेखको एवं पाठकों को सादर प्रणाम करते हुए निवेदन करना चाहूँगा कि प्राचीन भारत जैसी बातों के सन्दर्भ में हम प्रायः पूर्वाग्रह ग्रस्त होकर सोचते है. एक पूर्वाग्रह यह है कि प्राचीन काल में सारे लोग बहुत अच्छे ही थे , कोई गलत काम नहीं होता था, कोई गलत निर्णय नहीं होता था दूसरा पूर्वाग्रह जो कमियाँ और गलतियाँ ही ढूढता रहता है. हमें निरपेक्ष दृष्टि से देखना होगा कि हर समय हर तरह के लोग होते हैं. उचित करने वाले, अनुचित करने वाले या कि जो ठीक से तय नहीं कर पाते.और वह कोई सर्वमान्य व्यवहार नहीं होता.हर समय की कुछ घटनाएँ ही प्रमुखता पा पाती है उनको आधार बनाकर समग्र जनमानस का आंकलन नहीं किया जा सकता. जैसे आज के पांच सौ आठ सौ वर्ष बाद के इतिहास में स्वामी विवेकानंद या जयप्रकाश नारायण, डॉ अब्दुल कलाम जैसे लोगों के बारे में पढ़ा जायेगा तो यह कहा जायेगा कि उस समय के लोग ऐसे होते थे तो क्या सारे ही लोग ऐसे हैं ? नहीं हैं.या इस समय आतंकवादी है या और कोई जो भ्रष्टाचार या और असामाजिक गतिविधियों में लगे है ,इतिहास उनका भी बनेगा तो क्या इस समय सभी लोग ऐसे हैं ? नहीं . इसी प्रकार इतिहास को देखते समय हमें बहुत सावधानी रखना चाहिए. जो बातें उचित हैं, उपयोगी हैं उन्हें ही ग्रहण करना चाहिए.

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    1. प्रचीन भारतीया ग्रंथो के बारे में किसी सिर्फिरे बेवकूफ ने बिना तथ्यों के कुछ भी बेहुदा लिख दिया ,लिखने वाला कौन है ,उसकी असलियत क्या है और लेख की प्रामानिकता क्या है ये खोजे बिना ,उसको सेअर करने लग जाते है ,गिल्टी करने लग जाते है , यही जब किसी दूसरे धर्म ( इतिहास ) के बारे में जब सही तथ्य कोई बोल देता है तो हाहाकार मच जाता है , ऐसे फर्जी लेखक ब्लोग्स लिखने में वा भारतीया sanskrati का मजाक बनाने में लगे .

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  31. Ekdum sahi aapne.......ye sab khud ka bana banaya hua h or arth ka anarth likha gya hai..........अश्वनी नक्षत्रो का नाम है और इन्होंने उसे घोड़ी बना दिया......aap koi story padho or usme agar kisi ek word ka meaning agr galat hai to puri story v galat dhang se hi aapko samajh aayegi.....kuch yahi inhone likha hai yaha......or fir ye ek fact h ki andhvishwas failane k mamlo me media sabse aage h.

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  32. Vandanaji aap ko me batana chahta Hu Ki hamara des Kai varso tak mugalo aur angrejo ka gulam rahahe......

    Sabhi dharm apne aap ko dusre dharm se Mahan batana chahta he...

    Is liye mugalo aur angrejo ne bhi gulami ke varso me hamari sanskruti aur Bharat k gauravmayi itihaas ko bigad ne k liye hamare dharm grantho me sed-khani Ki he....ye ek real sachchai he..

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  33. इस का ब्लॉग ब्लोक करवा दो अबसे ऊपर लेफ्ट साइड में मोरे पर जाकर report abuse par click karo उसके बाद Hate speech, violent, or crude content पर क्लिक करो और इसकी ब्लॉग का पूरा url http://jaisudhir.blogspot.in/ डालो

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  34. Hahahaha ye joker kon he post dalne wala

    Ye bakwas sirf teen log kar sakte he

    Mulle
    Cristian missionary

    Sanskrit k aadhe adhure jankar

    Aur muje un logo par bhi hansi aati he jo bevkuf aise post bina kuch tatya ki jankari k sach man lete he

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  35. आप नाकारात्मकता से पीड़ीत है, लगता है आपके चारो तरफ केवल नाकारात्मक शक्तियां ही रहती है
    या आप बुराई की बातें कर लोगों को भ्रमित करना चाहती है।

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  36. This website is lit.Really excellent content and best online test series .MUst visit
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  37. Incest is occasionally mentioned in Buddhist literature too. In the Udaya Jàtaka the Bodhisattva is a prince who is compelled to marry his half-sister. Although the two sleep in the same room for many years they remain celibate (Ja.IV,105). In the Dasaratha Jàtaka the princes Ràma and Lakkhaõa marry their sister (Ja.IV,130). As with many ancient peoples the Sakya people, the Buddha's kinsmen, had a myth about their origins which included brother-sister incest. When the Koliyans were involved in a dispute with the Sakyans they taunted them by sayings that they `cohabited with their sisters like dogs, jackals and other animals'(Ja.V,413).
    During the Buddha's life there was an incident where a nun became infatuated with her son who was a monk and had sex with him, an offence entailing expulsion from the Saïgha (Vin.III,35). When this was brought to the Buddha's notice he said:`Does not this foolish man know that a mother shall not lust after her son or a son after his mother?' (A.III,67-8). Perhaps referring to this incident the Buddha also said: `Shame and fear of blame, are the two states that protect the world. If they did not protect the world it would not be clear who was one's mother or mother's sister, one's uncle's wife and the world would fall into confusion. The promiscuity seen amongst goats and sheep, chickens and pigs, dogs and jackals would prevail'(A.I,51).

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  38. हिन्दू धर्म पर कटाक्ष करती ओर अंट शंट झूटे आरोपों से युक्त एक अम्बेडकरवादी ऐ आर बाली ने हिन्दू धर्म पर पुराणों के अलावा वेदों के सन्धर्भ से आरोप लगाया कि वेदों में पिता पुत्री ,माता पुत्र , भाई बहन आदि के बीच योन सम्बन्धो की छुट थी |
    मनुस्मृति [3|1] के अनुसार आठ वर्ष से बड़े बालक या बालिका जो किसी भी कुल में जन्मा/जन्मी हो को तब तक ब्रह्मचर्य रखनी चाहिए जब तक वो वेदादि ग्रंथों की पूर्ण विद्या ग्रहण नहीं कर लेता/लेती
    आप तो वैदिक काल में कुछ ओर बता रहे थे जबकि वेदों में तो मौसी की लडकी , मामी की लडकी बुआ की लडकी आदि सगे सम्बन्धियों की कन्या से सम्बन्ध का निषेध है | ओर देखिये – ” पापामाहुर य: स्वसार निग्च्छात ” अर्थव १८/१/१४ अर्थत वो पापी है जो बहन से सम्बन्ध या विवाह करता है | देखा आपने वेदों में ऐसे सम्बन्धो का निषेध है | लेकिन क्या आप जानते है कि आपके ही भगवान बुद्ध ने अपने बुआ की लडकी यशोधरा से विवाह किया था अर्थात बुद्धो में इन सबकी छुट है आर्यों में नही |
    मनु 3:5 || ” अर्थत जो स्त्री माता की छ पीढ़ी ओर पिता के गोत्र की न हो विवाह करने के लिए उत्तम है |
    आपने लिखा वशिष्ठ का विवाह शतरूपा से हुआ | वाह क्या कहना आपका ये सब जानते है कि स्वयभू मनु की पत्नि का नाम शतरूपा था | देखिये ब्रह्माण पुराण २/१/५७ में शतरूपा को मनु की पत्नि बताया है ओर धरती के पहले स्त्री पुरुष | फिर आपने लिखा इला का विवाह मनु से ,,,ये भी आपकी मुर्खता कहे या कुंठा समझ नही आता लेकिन ये भी पौराणिक बन्धु जानता है कि मनु की पुत्री इला थी ओर उसका विवाह चन्द्रमा (सोम ) के पुत्र बुद्ध से हुआ जिनका एक पुत्र पुरुरवा था जिससे पुरु वंश चला | दुहिता दुर्हिता दुरे हिता भवतीत ” अर्थात जिसका दूर (गोत्र या देश ) में विवाह होना हितकारी हो | जब आर्यों के मतानुसार उनकी कन्या का विवाह दूर होना हितकारी है फिर किसी भी पुरुष से सम्बन्ध कर ले वो कन्या ये कल्पना क्या आपको बुद्ध ने बताई थी आपने अश्वमेध का उदाहरण देकर अश्व ओर स्त्री के बीच सम्बन्ध को लिखा ऐसा किसी वेद संहिता में विधान नही है | ये महीधर के भाष्य में है ओर महीधर ने मन्त्रो का विनियोग कल्प सूत्रों से किया अर्थात ऐसा विधान कल्पसूतरो में है महीधर कात्यायन श्रोत सूत्र अ. २० कंडिका ६ ओर सूत्र १६ से अश्वमेध में लिंग ग्रहण करने की प्रथा का उलेख करते हुए लिखते है – ” अश्वशिश्रमुपस्ये कुरुते वृषावाजिति ” अर्थात वृषाबाजी इत्यादी मन्त्र पढ़ते हुए रानी स्वयम घोड़े का लिंग अपनी उपस्थ इन्द्रिय में धारण करे | ये विधान कल्पसूत्र से है जिसमे वाममार्गियो द्वरा काफी गडबड की हुई है | इनको वेदों के समान प्रमाणिक नही बल्कि अप्रमाणिक काफी समय से माना जाता रहा है यदि कोई आपसे कहे की मधुर रसीले आमो का भोग करो ,,मखमली गद्दों का भोग करो तो आप तो आमो से योन सम्बन्ध बनाने ओर गद्दों से मैथुन क्रिया करना शुरू कर देंगे क्यूकि आपके अनुसार भोग का अर्थ सम्भोग ही होता है जबकि संस्कृत में भोग मतलब उपयोग में लेना होता है ऋषि दयानद जी ने भी यही स्पष्ट किया है ,ऋषि ने ऋषभेन उक्षेन भूञ्जीरन लिखा है अर्थात बैल रूपी साधन से खेती व कुए आदि चला कर सुख भोगे



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    1. प्रचीन भारतीया ग्रंथो के बारे में किसी सिर्फिरे बेवकूफ ने बिना तथ्यों के कुछ भी बेहुदा लिख दिया ,लिखने वाला कौन है ,उसकी असलियत क्या है और लेख की प्रामानिकता क्या है ये खोजे बिना ,उसको सेअर करने लग जाते है ,गिल्टी करने लग जाते है , यही जब किसी दूसरे धर्म ( इतिहास ) के बारे में जब सही तथ्य कोई बोल देता है तो हाहाकार मच जाता है , ऐसे फर्जी लेखक ब्लोग्स लिखने में वा भारतीया sanskrati का मजाक बनाने में लगे .

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  39. क्या आप जानते है कि आपके ही भगवान बुद्ध ने अपने बुआ की लडकी यशोधरा से विवाह किया था अर्थात बुद्धो में इन सबकी छुट है आर्यों में नही |

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  40. प्रचीन भारतीया ग्रंथो के बारे में किसी सिर्फिरे बेवकूफ ने बिना तथ्यों के कुछ भी बेहुदा लिख दिया ,लिखने वाला कौन है ,उसकी असलियत क्या है और लेख की प्रामानिकता क्या है ये खोजे बिना ,उसको सेअर करने लग जाते है ,गिल्टी करने लग जाते है , यही जब किसी दूसरे धर्म ( इतिहास ) के बारे में जब सही तथ्य कोई बोल देता है तो हाहाकार मच जाता है , ऐसे फर्जी लेखक ब्लोग्स लिखने में वा भारतीया sanskrati का मजाक बनाने में लगे .

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  41. expert batate hai ki ariya bideshi thea kya yah satya nahi hai.bhart ke mul nivashi dravin thea.right to aap ki bakvash kyo sune.happy life foever.hum sab budhist sab jantea hai.

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